Patanjala Yog Darshanam (पतञ्जलयोगदर्शनम्)
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Acharya Dinesh Shukla - Bharatiya Vidya Sansthan
Patanjala Yog Darshanam (पतञ्जलयोगदर्शनम्)
पतञ्जलयोगदर्शनम् (Patanjala Yog Darshanam) योग एक सूक्ष्म अध्यात्म विद्या है, जिसके माध्यम से योगीजन प्रभु का साक्षात्कार करते और भवसागर से तर जाते हैं एवं ब्रह्म के सानिध्य में रहकर परान्तकाल (३१ नील, दस खरब, चालीस अरब वर्ष) तक मोक्ष का आनन्द लेते और स्वच्छन्द विचरते हुए परमात्मा की इस अद्भुत सृष्टि को देखते हैं। मनुष्य योनि में रहकर ही योगसाधना करके मानवजीवन के फलचतुष्टय- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को प्राप्त किया जा सकता है। हिरण्यगर्भ योग के प्रथम प्रवक्ता है। हिरण्यगर्भ और कोई नहीं, परमात्मा के ज्योतिर्मय स्वरूप का ही नाम है। परमात्मा ने वेदों में योग का साङ्गोपाङ्ग वर्णन किया है। महर्षि पतञ्जलि ने समाधिप्रज्ञा से योग का पूर्ण विज्ञान समझा और विश्वकल्याण के लिए उसे योगदर्शन के सूत्रों के रूप में क्रमबद्ध कर दिया। पातञ्जल योगदर्शन योगविद्या का अनुपम और पूर्ण अन्य है। इसमें गागर में सागर भरा है।
Author : Acharya Dinesh Shukla
Publisher : Bharatiya Vidya Sansthan
Language : Sanskrit & Hindi
Edition : 1st 2015
Pages : 170
Cover : Paper Back
ISBN : 978-93-81189-43-3
Size : 14 x 2 x 21 ( l x w x h )
Weight :
Item Code : BVS 0156